चेक बाउंस केस सेवा
चेक बाउंस मामलों में समयसीमा का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. हम रिटर्न मेमो प्राप्त होने के बाद कानूनी नोटिस भेजने, 15 दिन की प्रतीक्षा, उसके बाद उचित अदालत में शिकायत दायर करने और रिकवरी या समझौते तक पूरी प्रक्रिया संभालते हैं. हर चरण में NI Act की समयरेखा का पालन किया जाता है.
हम क्या प्रदान करते हैं
- धारा 138 के तहत कानूनी नोटिस
- अदालत में शिकायत दायर करना
- केस प्रतिनिधित्व
- समझौता वार्ता
- चेक बाउंस डिफेंस
- राशि की वसूली
- लोक अदालत समझौता
लाभ
- त्वरित कानूनी नोटिस ड्राफ्टिंग
- NI Act की समयसीमा का पालन
- लागत प्रभावी समाधान
- प्रारंभिक रिकवरी पर फोकस
- स्पष्ट और नियमित संवाद
- NI Act प्रक्रिया का अनुभव
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चेक बाउंस में कानूनी नोटिस भेजने की समयसीमा क्या है?
चेक रिटर्न मेमो प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर कानूनी नोटिस भेजना आवश्यक होता है. नोटिस के बाद ड्रॉअर को भुगतान के लिए 15 दिन का समय दिया जाता है. उसके बाद भी भुगतान न हो तो आगे शिकायत दायर की जा सकती है.
भारत में चेक बाउंस के लिए क्या दंड हो सकता है?
NI Act की धारा 138 के तहत जुर्माना, कारावास या दोनों का प्रावधान है. अदालत केस की परिस्थितियों, राशि, पक्षों के आचरण और समझौते के प्रयासों को देखकर आदेश देती है. कई मामलों में शिकायतकर्ता का प्रमुख उद्देश्य राशि की वसूली होता है.
क्या चेक बाउंस केस अदालत के बाहर सुलझाया जा सकता है?
हाँ. चेक बाउंस मामले किसी भी चरण पर आपसी समझौते या लोक अदालत के माध्यम से निपटाए जा सकते हैं. कई मामलों में यह तेज और व्यावहारिक समाधान साबित होता है.
इस सेवा के बारे में और जानकारी चाहिए?
हमारी विशेषज्ञ टीम आपकी सभी प्रश्नों का उत्तर देने और आपकी जरूरतों के अनुसार सर्वोत्तम समाधान प्रदान करने के लिए तैयार है
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